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भारत बना यूरोप का प्रमुख डीजल सप्लायर, रूस में भी तेजी से बढ़ रही भारतीय ईंधन की मांग

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Sep 06, 2026 12:02 pm IST,  Updated : Sep 06, 2026 12:02 pm IST

अगस्त में रोजाना करीब 2 लाख बैरल डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : SHELL GLOBAL

रूस से डीजल की सप्लाई में भारी गिरावट और अमेरिका से यूरोप जाने वाली ईंधन की खेप में कमी के बीच यूरोप के लिए भारत डीजल के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। ऊर्जा और माल ढुलाई क्षेत्र के तत्काल आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में बाब-अल-मंदेब से यूरोप की ओर जाने वाले डीजल में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की रही। 

बाब-अल-मंदेब के रास्ते अगस्त में रोजाना लगभग 2 लाख बैरल डीजल की हुई सप्लाई

आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रोजाना करीब 2 लाख बैरल डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया। ये मात्रा एक साल पहले के स्तर के करीब है, जबकि मार्च और अप्रैल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से डीजल की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। भारत की रिफाइनरी यूनिट्स अब यूरोप की डीजल सप्लाई में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। 

तेल रिफाइन करने वाला दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है भारत

भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइन करने वाला देश है। भारत की स्थापित रिफाइनिंग क्षमता सालाना 25.81 करोड़ टन है, जो घरेलू ईंधन मांग से ज्यादा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था और वो दुनिया के प्रमुख रिफाइन्ड पेट्रोलियम उत्पाद के निर्यातकों में शामिल है।

यूरोप के साथ-साथ रूस में भी बढ़ रही है भारतीय ईंधन की मांग

भारतीय ईंधन की मांग अब यूरोप के साथ-साथ रूस में भी बढ़ रही है। हालांकि, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की उपलब्धता हो सकती है। वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में भारत में कच्चे तेल और कन्डनसेट की आवक लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि एक साल पहले ये करीब 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। 

कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बना रहा तो बदल सकते हैं हालात

ऐसे में अगर कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बना रहता है तो भारतीय रिफाइनरी यूनिट्स के पास निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त डीजल की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, रूस से डीजल की सप्लाई में भारी गिरावट बनी हुई है। अगस्त के पहले 25 दिन में रूस का समुद्री डीजल और गैसऑयल निर्यात औसतन केवल करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। ये एक साल पहले की तुलना में करीब 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम और 5 साल के औसत से 81 प्रतिशत नीचे है। 

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